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बोल बच्चन 'गोलमाल' की कॉपी नहीं है : असिन




असिन की गजनी, रेडी और हाउसफुल 2 जैसी तीन फिल्में सौ करोड़ क्लब में शामिल हैं। 6 जुलाई को उनकी 'बोल बच्चन' रिलीज होने जा रही है, जिसमें असिन की जोड़ी अजय देवगन के साथ है। फिल्‍म "बोल बच्‍चन" और उसमें आपके किरदार के बारे में बताएं? यह हास्‍य के साथ्‍ा-साथ्‍ा मानवीय रिश्‍ते वाली कहानी है। इसमें मेरा किरदार अब्‍बास (अभिषेक बच्‍चन) की बहन सानिया का है, जो बिलकुल जमीन से जुडी़ हुई है। अब्‍बास कमाई के लिए रकनापुर आता है, जहां उसे अखाड़ा किंग पृथ्‍वीसिंह (अजय देवगन) से झूठ बोलना पड़ता है। इधर पृथ्‍वीसिंह और सानिया के बीच नजदीकियां बढ़ने लगती हैं। फिल्‍म में लगातार झूठ, पहचान की भूल-भूलैया और फन दर्शकों को खूब हंसाने वाला हैं। साथ ही फिल्‍म एक्‍शन से भरपूर है। "हाउसफुल2" और अब "बोल बच्‍चन" दोनों कॉमेडी फिल्म हैं। दोनों में क्‍या फर्क महसूस किया? "बोल बच्‍चन" में सिचुएशनल कॉमेडी है। सिचुएशन ही कुछ ऐसी बनेगी की लोगों को हंसी आएगी। इसमे हमें अलग-अलग तरह के चेहरे बनाने व मिमिक्री की जरूरत नहीं पडी़, सभी ने रीयल कॉमेडी की है।

क्‍या आपने पुरानी "गोलमाल" देखी है, जिस पर "बोल बच्‍चन" आधारित है? हां, मैंने देखी है, पर "बोल बच्‍चन" ज्यों की त्यों नहीं है, यह सिर्फ "गोलमाल" से इंस्‍पायर है। बाकी पूरी फिल्‍म नए सिरे से लिखी गई है, इसमें कई नए पात्र हैं। "बोल बच्‍चन" साइन करने की वजह? मुझे फिल्‍म की कहानी पसंद आई। जब रोहित मुझे स्‍क्रिप्‍ट सुना रहे थे तो सुन कर ही मुझे इतनी हंसी आ रही थी। ऐसे में इस फिल्‍म को ना करने का सवाल ही नहीं उठता। रोहित शेट्टी के साथ यह आपकी पहली फिल्‍म है। कैसा अनुभव रहा? काफी अच्‍छा रहा। रोहित का वर्किग स्‍टाइल दक्षिण के निर्देशकों की तरह ही है। इस कारण हमने बडी़ सहजता से काम किया। दक्षिण के निर्देशकों की तरह ही रोहित को दुबली-पतली साइज जीरो वाली हीरोइन पसंद नहीं है, इस कारण मुझे फिल्‍म के लिए वजन बढ़ाना पडा़। सेट पर भी रोहित अक्‍सर मुझे मावे की बनी चीजें खिलाते थे, जिससे मेरा वजन बढ़ जाए। मुझे डांस का बहुत शौक है, मगर रोहित ने मुझे डांस के कम मौके दिए। मेरे हिस्‍से सिर्फ एक ही गाना आया। कुछ एक्‍शन करने के मौके जरूर मिले। अजय देवगन के साथ आपकी दूसरी फिल्म है। क्या कहना चाहेंगी? इससे पहले मैंने उनके साथ "लंदन ड्रीम्‍स्" में काम किया है। मगर मैंने पहली बार देखा ‍िक अजय रॉकिंग डांस करते हैं। जब वे कुछ पहलवानों के साथ डांस कर रहे थे, उन्‍हें देख कर मैं तो आश्‍चर्य में पड़ गई।

आपने अब तक आमिर खान, सलमान खान, अक्षय कुमार, अजय देवगन जैसे बडी़ उम्र के कलाकारों के साथ ही काम किया है। क्‍या हमउम्र कलाकारों के साथ काम नहीं करना चाहतीं? यह तो मेरी खुशकिस्‍मती है कि मेरे करियर की शुरुआत उन कलाकारों के साथ हुई जो अपने आप में सुपर स्‍टार हैं। इन सभी के साथ काम करना हर अभिनेत्री का सपना होता है। जहां तक हम उम्र कलाकारों के साथ काम करने का सवाल है तो मैं मौके का इंतजार कर रही हूं। आपने दक्षिण भारतीय फिल्मों में काम करना बंद कर दिया है? मुझे तो वहां काम करने में मजा आता है। स्‍टार का दर्जा वही से मिला। दक्षिण की फिल्मों में वैरायटी वाले रोल निभाएं हैं। फिलहाल बॉलीवुड पर ज्‍यादा ध्‍यान दे रही हूं। आप बॉलीवुड में भी कम फिल्‍में कर रही हैं? मैं सिर्फ पैसे के लिए फिल्‍में नहीं करती हूं। मुझे जो फिल्‍में पसंद आती हैं वही साइन करती हूं। इसके अलावा दक्षिण का स्‍टारडम का स्‍वाद चखने के बाद बॉलीवुड आई हूं। मैं "दिखोगे तो बिकोगे" में विश्‍वास नहीं करती।

नंबर गेम से दूर असिन


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वैसे, तो साउथ की कई हिरोइनों ने बॉलिवुड में हाथ आजमाए हैं, लेकिन असिन की बात कुछ अलग है। आखिर उनके खाते में गजनी, रेडी, हाउसफुल 2 जैसी जबर्दस्त हिट फिल्में जो हैं। खास बात यह है कि उनकी ये तीनों ही फिल्में 100 करोड़ वाले क्लब में शामिल हैं। हालांकि इस सक्सेस से असिन खुश तो हैं, लेकिन खुद को वह कॉम्पिटीशन से दूर ही रखना चाहती हैं और नंबर रेस में भी नहीं आना चाहतीं। असिन कहती हैं, 'मैं नंबर्स की परवाह नहीं करती। चाहे वह नंबर वन एक्ट्रेस का ताज हो या फिर 100 करोड़ क्लब। मैं खुश हूं कि मेरी फिल्में इस हद तक सफल रही हैं, लेकिन हर बार ऐसा होने की उम्मीद मैंने की भी नहीं थी। आखिर यह मेरे हाथ में नहीं हैं। मैं बस अपना काम अच्छी तरह करती हूं।' असिन का यह भी मानना है कि अगर फिल्म चलती है, तो बहुत लगता है। लेकिन फिल्म बनाते हुए यही लगता है कि पूरे एफर्ट्स मन से किए जाएं, ताकि दर्शकों को यह अच्छी लगे। असिन के अलावा, करीना और सोनाक्षी सिन्हा भी 100 करोड़ क्लब में शामिल हैं। क्या वह उनसे राइवलरी फील करती हैं? इस बात को असिन सिरे से नकार देती हैं। वह कहती हैं, 'मुझे नहीं लगता है कि हीरोइनों के बीच में ऐसी कुछ बात होनी चाहिए। बल्कि उन्हें बस अपने रोल पर फोकस करके मस्त रहना चाहिए। यह राइवलरी जैसी बात हीरोज के लिए ही ठीक है। आखिर हमारी इंडस्ट्री मेल डॉमिनेटेड है और फिर फिल्मों की प्रॉफिट शेयरिंग भी तो उन्हीं को मिलती है।' वाकई असिन की बात में दम है, लेकिन सवाल यह है कि क्या बाकी हीरोइनें उनकी इस पॉलिसी को फॉलो करेंगी!

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बोल बच्चन की कहानी


बैनर : अजय देवगन फिल्म्स, श्री अष्टविनायक सिनेविजन लिमिटेड 
निर्माता : ढिलिन मेहता, अजय देवगन 
निर्देशक : रोहित शेट्टी 
संगीत : हिमेश रेशमिया, अजय-अतुल 
कलाकार : अजय देवगन, अभिषेक बच्चन, असिन, प्राची देसाई, कृष्णा अभिषेक, अर्चना पूरनसिंह, असरानी, नीरज वोरा, अमिताभ बच्चन (आइटम नंबर)
रिलीज डेट : 6 जुलाई 2012

अजय देवगन और रोहित शेट्टी की सुपरहिट जोड़ी मनोरंजक फिल्म की गारंटी हो गई है। गोलमाल सीरिज और सिंघम जैसी सफल फिल्में ये दोनों दे चुके हैं और अब ‘बोल बच्चन’ की बारी है। इस बार अभिषेक बच्चन भी फिल्म में हैं, जो लंबे समय से असफलता भोग रहे हैं। हो सकता है कि रोहित और अजय के सहारे अभिषेक को सफलता का मुंह देखने को मिल जाए। फिल्म की कहानी ऋषिकेश मुखर्जी की महान फिल्म ‘गोलमाल’ से प्रेरित बताई जा रही है।
abhishek bachchan and ajay davgain

 Abhishek bachchan ,Ajay davgain and  Amitabh bachchan,

abhishek bachchan and ajay davgain


दिल्ली में रहने वाला अब्बास अली (अभिषेक बच्चन) आर्थिक तंगी से गुजर रहा है। दिल्ली छोड़ वह अपनी बहन सानिया (असिन) के साथ एक छोटे शहर रकनापुर आ पहुंचता है ताकि वहां कुछ काम कर पैसा कमा सके।

अब्बास को अखाड़ा किंग पृथ्वीराज रघुवंशी (अजय देवगन) के यहां सुपरवाइजर का काम मिल जाता है, परिस्थितिवश उसे पृथ्वीराज को अपना नाम गलत बताना पड़ता है। अब्बास को उम्मीद नहीं रहती कि यह झूठ उस पर बहुत भारी पड़ने वाला है।


अखाड़ा किंग पृथ्वीराज गुस्से का तेज है और झूठ बोलने वालों से तो उसे सख्त नफरत है। पृथ्वीराज के गुस्से से डरने वाला अब्बास इस बात को अच्छी तरह जानता है और एक झूठ को छिपाने के लिए कई झूठ बोलता चला जाता है। इससे कई ऐसे प्रसंग घटते हैं जो दर्शकों को हंसने पर मजूबर करते हैं।

निर्देशक के बारे में : 
रोहित की पिछली चार फिल्म सिंघम (2011), गोलमाल 3 (2010), ऑल द बेस्ट (2009) और गोलमाल रिटर्न्स (2008) सफल हो चुकी हैं। इसके अलावा उन्होंने गोलमाल (2006) जैसी सफल फिल्म भी दी है। रोहित चाहते हैं कि टिकट खरीदकर सिनेमाघर में फिल्म देखने आए दर्शक के पूरे पैसे वसूल होने चाहिए, लिहाजा वे हर उम्र और हर वर्ग के दर्शक को ध्यान में रखकर फिल्म बनाते हैं।