
निर्देशक निशिकांत कामत की फोर्स में जॉन अब्राहम अपने स्टील जैसे ऐब्स दिखाते हुए एक निडर सिपाही का किरदार अदा करते हैं जो ड्रग माफिया को जड़ से मिटा देना चाहता है। एक एक्शन मूवी के तौर पर तमिल फिल्म काखा काखा की रीमेक फोर्स कुछ अच्छे एक्शन सीन देती है। फिल्म में कुछ बखूबी संपादित किए गए हैंड टू हैंड फाइट सीक्वेंस हैं, पीछा करने वाले जबरदस्त चेज सीक्वेंस हैं और थोड़ा सा ज़्यादा ही खून-खराबा है। फिर भी इसके बनावटी किरदारों और इसके मुख्य किरदार के कमजोर अभिनय की वजह से आप इसके हीरो से इमोशनली खुद को जोड़ नहीं पाते और ना ही उसके दर्द को महसूस कर पाते हैं।
एक थ्रिलर से टिपिकल बदले की कहानी की ओर बढ़ते हुए जॉन अब्राहम का किरदार एसीपी यशवर्धन और उनकी नारकोटिक्स यूनिट एक प्लान्ड ऑपरेशन के तहत एक बहुत बड़े ड्रग माफिया को पकड़ लेती है पर खून के प्यासे उसके भाई का पता लगाने में नाकाम होती है।
बदले की भावना दिल में लिए उसका भाई जिसका किरदार निभाया है इम्प्रेसिव विदयुत जामवाल ने, खून खराबे और हत्या करने पर उतर आता है, जिसके निशाने पर ना सिर्फ वो पुलिस वाले हैं जिन्होंने उसके भाई को मारा था बल्कि उनकी पत्नियों को भी वो अपना निशाना बनाता है।
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